300 आलिशान कारो का मालिक है ये नाइ , बाल काटने जाता है ऑडी में

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Barbar Ramesh : हर व्यक्ति बड़े – बड़े ख्वाब देखता है, जहां उसके सपने ऐसे रहते जिसे करने से पहले वो काफी कुछ सोचता भी है। लेकिन कहते है न कि अगर कोई सपने देखो और उसे पूरी लगन के साथ करो तो उसका फल एक न एक दिन ज़रूर मिलता है। अब इसी बीच ऐसा ही कुछ सार्थक कर दिखाया है। बेंगलुरु के रहने वाले रमेश बाबू ने जिनकी लाईफ किसी मूवी की तरह है नहीं। दरअसल, उन्होंने अपने सपने को साकार करने के लिए पूरी सिद्दतत के साथ मेहनत की है। तब जाकर उनके ख्वाब पूरे हुए है। आगे हम आपको इस लेख के माध्यम से उनकी कहानी से रूबरू करवाते है। तो चलिए जानते है रमेश बाबू की कहानी।

रमेश बाबू की कहानी

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि जब रमेश बाबू केवल सात वर्ष के थे। तब उनके सर से उनके पिता का साया उठ चुका था, जो की एक सलून में नाई का काम करते थे। रमेश बाबू ने खुद अपनी कहानी से सबको रूबरू करवाया है। उन्होंने बताया कि उनके पिता के जाने के बाद घर की आर्थिक स्थिति डामाडोल हो गई थी। परंतु मां ने जैसे – तैसे कर गुजारा किया और घर परिवार चलाया। जहां उनकी मां ने उन्हें 12वी तक पढ़ाने की प्रयास की। जब वो बारहवीं में थे तब वो फेल हो गए थे। जिसके बाद इन्होंने अपने घर की जिम्मेदारी संभालनी स्टार्ट कर दी।

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बेंगलुरु के नाई रमेश बाबू की कहानी जाना उसने अपने कानो पर यकीन नहीं किया कि सिर्फ 7 साल में अपने पिता को खोने के बाद कैसे रमेश ने अपने घर की जिम्मेदारी संभाली। वही उन्होंने शुरुआत में घर -घर जाकर पेपर भी बेचा है।

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घर -घर जाकर रमेश पेपर भी बेचा करते थे

आपको बता दे कि जब रमेश बाबू 12वीं में फेल हो गए थे। तब उनकी मम्मी ने उन्हें जॉब करने की सलाह दी। जिसके बाद रमेश बाबू ने पेपर बेचने के बारे में सोचा। जहां उन्होंने पेपर बेचने स्टार्ट किया और उसके बाद सलून में नाई का कार्य करने लगे। आपको बता दे की धीरे-धीरे उन्होंने सेकंड हैंड गाड़ी लेकर उसे भाड़े पर देना स्टार्ट किया। जिसमें उन्हें काफी सफलता भी मिली।

रमेश बाबू ने बाल भी करने का काम किया। जहा उन्होंने बताया कि उन्हें कार के कलेक्शन का भी काफी शौक था। जहां पिछले 30 वर्षो से वह इसी वजह से कारों को कलेक्शन में जोड़ रहे हैं। वही उनके पास कई शानदार गाडियां भी है। आपको जानकर हैरानी होगी रमेश अपने रोल्स-रॉयस गाड़ी से बैठकर अपने सलून में आते हैं।

 

बाल काटने जाते है महंगी गाडी में रमेश नाइ

 

रमेश बाबू ने बताया कि आज भले ही वह एक सफल व्यक्ति बन गए है। लेकिन उन्हें अपना आज भी स्ट्रगल भरी जिंगदी याद है। रमेश के पास रोल्स-रॉयस की तीस से भी ज्यादा कारे है और वह उन्हें हर दिन 50,000 रुपए में इसे किराए पर चलाने के लिए देते है। रोल्स – रॉयस के अलावा रमेश बाबू के पास मर्सिडीज़, बीएमडब्ल्यू और रेंज रोवर जैसी शानदार गाडियां भी ही।

 

जहां एक समय था वो संघर्ष भरी जिंदगी जी रहे थे। वही आज के समय ने रमेश बाबू अपनी मेहनत और लगन के दम पर अपने लिए घर और कई गाड़ियों के कलेक्शन भी रख लिए है। कहते है ना अगर मेहनत ईमानदारी से की जाए तो सफलता एक न एक दिन ज़रूर मिलती है। जैसे की रमेश बाबू को मिली है।